मेघवाल समाज के प्रथम ब्लॉग ‘मेघयुग’ पर आपका स्वागत हैं।

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रविवार, 20 नवम्बर 2011

श्रीमती मंजू मेघवाल

श्रीमती मंजू मेघवाल




पुष्कर (अजमेर) में 20 अप्रैल,1977 को जन्मी श्रीमती मंजू मेघवाल एम.ए. (लोक प्रशासन) तक शिक्षित हैं। इनका विवाह श्री ओमप्रकाश मेघवाल के साथ हुआ तथा आपके दो पुत्र हैं। पेशे से व्यवसायी श्रीमती मेघवाल तेरहवीं राजस्थान विधानसभा के लिए जायल (नागौर) विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई।

     
     श्रीमती मेघवाल ने बिना राजनितिक पृष्ठ भूमि के उत्तरोतर सफलता हासिल की हैं। वर्ष 2000 में जायल पंचायत समिति में निर्विरोध पंचायत समिति सदस्य चुनी गई। इसी के साथ वे निर्विरोध प्रधान निर्वाचित हुई। प्रधान का कार्यकाल पूर्ण होते ही इन्होंने विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी जताई। लेकिन तब इन्हें टिकिट नहीं दिया गया। इसके बावजूद   ये कांग्रेस संगठन के प्रति जुड़ाव रखते हुए महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष के रूप में पार्टी को अपनी सेवाएं देती रही। पिछले विधानसभा चुनाव में इन्हें टिकिट दिया गया। वे विधायक के रूप में निर्विचित हुई। ये राजस्थान विधानसभा की महिला एवं बाल कल्याण समिति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति की सदस्य रही हैं। दो माह पूर्व ही इन्हें कांग्रेस जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

   

       राज्यपाल श्री शिवराज पाटील ने 16 नवम्बर, 2011 को श्रीमती मेघवाल को राज्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई । इन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग दिया गया हैं।


Smt. Manju Devi Meghwal

Party Name: Indian National Congress
Constituency: Jayal (SC),
Opp. Indian Public School,, Bypass Road, Jayal, Nagaur. Rajasthan
         Phone No.: 01583-272327


         3/1, Vidhayak Nagar (West), Jaipur
         Mobile No.: 9413710526, 94133-68125








मेघ न्यूज़: मेघवंश महाकुम्भ 27 नवम्बर को जयपुर में

मेघ न्यूज़: मेघवंश महाकुम्भ 27 नवम्बर को जयपुर में: जयपुर,20 नवम्बर। मेघवंश समाज के मान, सम्मान एवं स्वाभिमान की रक्षा, सामाजिक एकता एवं चहुमुंखी विकास के लिए मेघवंश समाज का मेघ महाकुम्भ 27 न...

राजस्थान में मंत्री मंडल का पुर्नगठन,श्रीमती मंजू मेघवाल राज्यमंत्री

राजस्थान में हाल ही में मंत्री मंडल का पुर्नगठन किया गया हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 14 नवम्बर को अपने सभी मंत्रीयों को विश्वास में लेते हुए सामूहिक इस्तिफे लिए। लेकिन मंजूरी के लिए कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल सहित कुल 6 मंत्रीयों के इस्तिफे राजयपाल को भिजवा दिए गए। 16 नवम्बर को मेघवाल की जगह पर सूचना एवं जनसंपर्क राज्य मंत्री अशोक बैरवा को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इससे अनुसूचित जाति वर्ग की भरपाई तो कर दी गई। लेकिन कैबिनेट स्तर के मेघवाल मंत्री को हटाकर उनके स्थान पर जायल से निर्वाचित श्रीमती मंजू मेघवाल को लिया गया। उन्हें महज राज्यमंत्री बनाया गया और महिला एवं बाल विकास विभाग दिया गया। उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग की कैबिनेट मंत्री श्रीमती बीना काक की अधिन काम करना होगा।

श्रीमती मंजू मेघवाल,महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री-
http://jayalratan.blogspot.com/2011/11/blog-post_3105.html

रविवार, 25 सितम्बर 2011

MEGHnet: Meghdhara - Media - मेघ समाज के समाचार-पत्र का प्र...

MEGHnet: Meghdhara - Media - मेघ समाज के समाचार-पत्र का प्र...: 11 सितंबर 2011 को मैं इंटरनेट खोल कर बैठा था कि जितनी जल्दी हो सके कच्छ, गुजरात से प्रकाशित होने वाले मेघ समाज के नए समाचार-पत्र ‘ ...

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

राष्ट्रीय सर्व मेघवंश महासभा सेमीनार का निर्णय

राष्ट्रीय सर्व मेघवंश महासभा,इण्डिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल डेनवाल ने बताया है कि मेघवंश समाज के लोग पूरे भारत में एक होते हुए भी अनेकता की जिन्दगी मजबूरी वश जी रहे है। मेघवंशज को पूरे भारत मे 1671 नामों एवं उपनामों व उप जातियों के नामों से जाना जाता है। जिन्हें आज के समय की मांग एवं परिस्थितियों वश एक जुट करने का प्रयास कर रहे है। पूरे भारत में मेघवंश की जनसंख्या 16ः से 21ः तक है। परन्तु अनेको नामों से बंटे हुये हैं। इसलिए कर्मचारी-कर्मचारी भाई-भाई की तर्ज पर अपनी-अपनी जातियों का वजूद कायम रखते हुए मेघवंशज के बेनर के नीचे एक सुत्र में बांधने का सर्व सम्मत निर्णय सेमीनार में किया गया।
-मेघवंश को एक सूत्र में कैसे बांधा जाए-
मेघवंश के बिखरें व बिछडे हुए 1671 नामों को एक सूत्र में पिरोकर कर मेघवंश के मान-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा की जावे। विराट सम्राट मेघऋषि राजऋषि भगवान के वंशजो की देश व प्रदेशों में 1671 जाति नामों से सम्बोधित किये जाने वाले मेघवंशियो को एक मंच पर एकत्रित व संगठित कर समाज में भावात्मक एकता का बोध करा मेघवंशियों के मान सम्मान एवं स्वाभिमान की चेतना जगाना।
-मेघवंश शैक्षिक तौर पर सम्पन्न कैसे हो-
देव नारायण बोर्ड की तर्ज पर मेघवंश कल्याण बोर्ड देश व प्रत्येक राज्य में बनाया जाकर प्रत्येक में लगभग 2000 करोड का बजट प्रावधान कर मेघवंश को ही अध्यक्ष व ट्रष्टी बनाया जावे जिससे इस वर्ग की बेगारी,भूखमरी व हमारे छात्र-छात्राओं का भविष्य उज्जवल हो सके क्योंकी सवर्ण समाज के बच्चो को पढने के लिए जगह-जगह उनके अपने समाज के विद्यालय-कालेज आदि है। सवर्ण वर्ग के त्राओं छात्र-छात्राओं से मुकाबला करनें एवं साथ ही लडके-लडकियों को देश-विदेश में पढने के लिए कल्याण बोर्ड के माध्यम से व शिक्षा विकास के लिए सहायता मिलें। मेघवंश समाज में शिक्षा तथा विद्या के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से शिक्षालयों-विद्यालयों में प्रवेश का निरन्तर योजना बद्ध अभियान चलाने के साथ ही बालक-बालिकाओं के लिए जिला व तहसील स्तर पर छात्रावासों के निर्माण की अलख जगाना व बहुआयामी उच्च शिक्षा-प्रशिक्षण हेतु प्रोत्साहित करने के लिये मेघवंश विद्यालय,महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय की स्थापना की संभावनाओं को मूर्त रूप देना

बृहस्पतिवार, 3 फरवरी 2011

मेघवाल प्रतिभाएं-2

नौ बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया गणपत मेघवाल ने

- भरत मेघवाल
पाली.शहर के सरदार पटेल नगर में रहने वाले गणपत मेघवाल ने फुटबाल खेल में अब तक कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने नौ बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। मेघवाल का कहना है कि इस खेल के लिए उन्हें उनके पिता पूनमचंद ने प्रेरित किया। 1984 में उन्होंने फुटबाल खेलना शुरू किया था। खेल में बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्होंने अब तक 11 बार राज्य प्रतियोगिता में भाग लेकर शानदार प्रदर्शन किया। गणपत की इस खेल में मजबूत पकड़ होने के कारण अधिकतर प्रतियोगिताओं में उन्हें स्थान मिलता रहा। उन्होंने कोटपूतली में 1986 में आयोजित स्कूल स्टेज प्रतियोगिता, राजस्थान स्टेट चैंपियनशिप 1990, बाडमेर, जोधपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, डिडवाना, बूंदी, सवाईमाधोपुर व अजमेर समेत कई जिलों में आयोजित राजस्थान स्टेट सीनियर प्रतियोगिताओं में भाग लिया। मेघवाल वर्तमान में तीन साल से पाली जिला फुटबाल संघ में ज्वाइंट सेक्रेट्री पद संभाले हुए हैं। अब वे विभिन्न स्थानों पर होने वाली प्रतियोगिताओं में टीम लेकर जाते हैं।

इन नेशनल प्रतियोगिता में लिया भाग

उन्होंने उदयपुर में आयोजित तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिता, बीकानेर में आयोजित भगवत मेमोरियल फुटबाल प्रतियोगिता में तीन बार, बीकानेर में आयोजित बच्ची गोल्ड कप प्रतियोगिता, गंगानगर में आयोजित दशहरा फुटबाल प्रतियोगिता में भाग लिया। इसी प्रकार गुजरात के बदौड़ा में आयोजित संतोष ट्राफी केंप में चयन हुआ।

ब्लड डोनेशन में भी आगे

गणपत मेघवाल खिलाड़ी होने के साथ ब्लड देने में भी हमेशा आगे रहते हैं, वे समय समय पर आयोजित शिविरों में रक्तदान करते रहते हैं। अब तक वे 60 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं।

कई बार हुए सम्मानित

रक्तदान करने पर उनको कई बार सम्मानित भी किया गया है। रक्तदान में अव्वल रहने पर वे पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे व राजेंद्र चौधरी के हाथों सम्मानित हो चुके हैं।

(लेखक श्री भरत मेघवाल दैनिक भास्कर के पाली संस्करण में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं और यह आलेख दैनिक भास्कर से साभार प्रकाशित किया जा रहा हैं।)
Link-http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-1170235-1809596.html

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

ऐसा चाहूं राज मैं मिले सबन कों अन्न

पिछले दिनों थांवला जिला-जालोर राज.से श्री भंवरलाल मेघवाल ने निम्नांकित पुस्तक अंश ऑरकूट पर भेजा। जिसे यहां पुनः पोस्ट किया जा रहा हैं।

गुरु रैदास ने सतगुरु कबीर के साथ मिलकर दलितों को शिक्षा दी तथा लोगो में श्रमण धर्म का प्रचार प्रसार भी किया.लेकिन एक काम में वे सतगुरु कबीर से भी दो कदम आगे निकल गए.उन्होंने दलित समाज को चेताया कि केवल दलित समाज के लोग ही असल में भारत के शासक रहे है.सिन्धु सभ्यता अर्थात दलित सभ्यता से लेकर मौर्य काल तक भारत पर केवल और केवल दलितों का शासन रहा है.सम्राट वृह द्रथ कि हत्या के बाद उनका राज छीन लिया गया और उन्हें गुलाम बना दिया गया.गुरु रैदास यह ऐतिहासिक सच्चाई जानते थे ,अत: उन्होंने दलितों को उनके इतिहास से परिचित करवाया.
*उन्होंने कहा कि दलित भारत के असली शासक है.भारत पर सदैव दलित कही जाने वाली जातियों का राज रहा है.उन्होंने कहा :

हम बड कवि,कुलीन,हम पंडित,हम जोगी,सन्यासी !
ज्ञानी, गुनी, सूर, हम दाते,यह बुद्धि कभी न नासी !!
नरपत एक सिंहासन सोया,सपने भय भिखारी !
अछूत राज बिछड़े दुःख पाया,सोई दस भई हमारी !!

*वे बोले :

पराधीन का दीन क्या,पराधीन बेदीन !
रैदास दास पराधीन को सब ही समझें हीन !!

*दलितों कि मुक्ति का एक ही रास्ता है कि वे अपने गले से गुलामी
का फंदा उतारें तथा अपना छिना हुआ राज फिर से प्राप्त करें,उन्होंने कहा :

पराधीनता पाप है जान लेवो रे मीत !
रैदास दास पराधीन को कौन करे है परीत !!
ऐसा चाहूं राज मैं मिले सबन कों अन्न !
छोटे बड़े सम बसे,रैदास रहे प्रसन्न !!

(साभार-पुस्तक ऐसा चाहूं राज लेखक श्री कुलदीप कुमार,पृष्ठ 51)

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

लोक का आलोक

डॉ. राजेश कुमार व्यास
"कलावाक्" ब्लॉग से साभार

सौन्दर्य की साधना किसी भी समाज के सांस्कृतिक स्तर का निर्धारण करती है। दैनिन्दिनी वस्तुओं, उपकरणों में कलात्मक अंकन और रंग संयोजन उन्हें सादृश्यता प्रदान कर आनंददायी बनाता है। कला का यही तो सौन्दर्यान्वेषण है। इस सौन्दर्यान्वेषण में शिल्प, चित्र, मूर्ती और वास्तु कलाओं का समग्रता से विस्तार अर्न्तनिहित जो होता है।

बहरहाल, हमारी जो परम्परागत कलाएं हैं, उनमंे जीवन के हर पहलू की अनुगूंज है। मानव के अपने परिवेश की स्मृतियां इनमंे हैं और है अर्न्तनिहित भावना का साकार रूप। राजस्थान तो हस्तकलाओं, हस्तशिल्प परम्पराओं का जैसे गढ़ है। पन्नालाल मेघवाल ने पिछले दिनों अपनी पुस्तक ‘शिल्प सौन्दर्य के प्रतिमान’ जब भेंट की तो लगा मैं हस्तकलाओं, हस्तशिल्प के इस गढ़ में जैसे प्रवेश कर गया हूं। गढ़ का द्वार खुलता है तलवार, खुखरी, खंजर, गुप्ती, ढ़ाल-तलवार आदि पर नक्काशी करने वाले सिकलीगर परिवारों की कला के बखान से। आगे बढ़ता हूं तो पुस्तक गढ़ की दरो-दीवारों पर कांच पर सोने के सूक्ष्म चित्रांकन की बेहद सुन्दर थेवा कला है। मिट्टी से निर्मित छोटे-छोटे गवाक्ष, जालियां, कंगूरों की गृहसज्जा में उपयोग आने वाली मिट्टी की महलनुमा कलाकृतियां ‘वील’ है। लकड़ी का चलता फिरता देवघर काष्ठ-तक्षित कावड़ है और है बाजोट, मुखौटे, कठपुतली, लाख की कलात्मक वस्तुएं, मोलेला की मृणमृर्तियां, पीतल के गहने-भरावे, शीशम की लकड़ी पर किये तारकशी आदि की मनोहारी कलाएं। लोक मन के अवर्णनीय उल्लास, उमंग की सौन्दर्य सृष्टि करती कलाओं का मेघवाल का पुस्तक गढ पाठकीय दीठ से हर ओर, हर छोर से लुभाता है। पन्नालाल ने इस गढ़ को कलाकारों से बतियाते और राजस्थान की कला से संबद्ध बहुतेरी पुस्तकों को खंगालते रचा है। इस रचाव में वे राजस्थान की प्रमुख कलाओं, हस्तशिल्प आदि की सहज जानकारी तो देते ही हैं, साथ ही लुप्त होती उन कलाओं की ओर भी अनायास ध्यान आकर्षित करते हैं, जिन्हें आज संरक्षण की अत्यधिक दरकार है।

कला की प्रभा और प्रतिभा सदा सर्वोन्मुखी रही है। ऐसा है तभी तो हमारी इन पारम्परिक कलाओं को हम आज भी अपने घरों मंे सहेजे हुए हैं। लोक का क्या अब यहीं ही नहीं बचा रह गया है आलोक!

Link- http://drrajeshvyas.blogspot.com/2010/09/blog-post_18.html

बुधवार, 22 दिसम्बर 2010

वीर सपूत-1

वीर सपूत संपतलाल मेघवाल

देश के लिए मर मिटने का जज्बा हर भारतवासी के मन में शुरू से रहा हैं। फिर चाहे वह किसी भी कौम या मजहब का हो। जब भी मौका आया,मेघवाल समाज भी देश के लिए कुर्बानी देने में हमेशा आगे रहा हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा में चिंतलनार क्षेत्र में हुए नक्सली हमले में के टीटनवाड़ के लाड़ले संपतलाल पुत्र मंगलाराम मेघवाल की शहादत को देश सदैव याद रखेगा। संपतलाल सीआरसीएफ में एमटी ड्राईवर थे। संपतलाल काफी मिलनसार थे।
संपतलाल 17 अक्टूबर 74 में जन्मे थे। शहीद ने 11 वीं तक की शिक्षा ग्रहण की थी। जनवरी 94 में सीआरसीएफ की 89 बटालियन में भर्ती हुए। जून 99 को जवाहरपुरा नुआं में शादी हुई। 32 वर्षीय पत्नी सरोजदेवी गांव में ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। शहीद का बड़ा बेटा मयंक आठ साल का है और चौथी में पढ़ता है। छोटी बिटिया वंशिका चार साल की है और यूकेजी में पढ़ रही है।
शहीद के परिवार में 60 वर्षीया माता दडकी देवी के अलावा एक बडे़ भाई ग्यारसी लाल है जो बैंक में सहायक मैनेजर के पद पर कार्यरत है। शहीद की दो बहिनें बिमला और संतोष हैं,जो विवाहित हैं। शहीद सम्पत लाल चार भाई बहिनों में सबसे छोटा था। बताया जाता हैं कि संपत दो माह की छुट्टी काटकर 24 फरवरी को ही ड्यूटी पर लौटा था।
तीन रोज पहले ही संपत ने अपनी पत्नी को फोन कर घर के हालचाल पछते हुए बताया था कि ऑपरेशन पर जा रहा हूं। तीन रोज का टूर है। जल्दी ही छुट्टियां लेकर घर लौटूंगा। लेकिन होनी को कुछ ओर ही मंजूर था। छह अप्रेल 2010 को सीआरसीएफ टुकड़ी पर हुए हमले में संपतलाल शहीद हो गए।
शहीद सम्पत लाल मेघवाल की अंत्येष्टि भी आठ अप्रेल 2010 को पूर्ण राजकीय एवं सैनिक सम्मान के साथ राजस्थान में उनके पैतृक गांव झुंझुनूं जिले की उदयपुरवाटी पंचायत समिति के टीटनवाड गांव में की गई। सहकारिता मंत्री परसादी लाल मीणा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा,पर्यटन राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढा, सांसद शीशराम ओला, जिला प्रमुख डॉ. हनुमान प्रसाद,उप जिला प्रमुख विद्याधर सिंह गिल, पुलिस महानिरीक्षक एम.एल. लाठर, जिला कलेक्टर आलोक गुप्ता, जिला पुलिस अधीक्षक अजयपाल लाम्बा सहित बडी संख्या में शहीद के परिजनों एवं जन प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने गांव के लाडले को पुष्प चक्र व पुष्प मालाएं चढाकर श्रद्घांजलि अर्पित की। पूरे देश और मेघवाल समाज को भारत माता के ऐसे वीर सपूतों पर गर्व हैं।